ECOSOC Youth Forum 2025: भारत की युवा आवाज़ अनन्या शर्मा
जब भी शिक्षा और उसका भविष्य चर्चा में आता है, तो अक्सर बड़े नेता या विशेषज्ञ अपनी बात रखते हैं। लेकिन इस बार, ECOSOC Youth Forum 2025 के मंच पर भारत की ओर से अनन्या शर्मा ने कुछ अलग ही रंग जमा दिया। दिल्ली यूनिवर्सिटी के शहीद भगत सिंह कॉलेज की तीसरे वर्ष की छात्रा अनन्या ने जिस तरह महिलाओं और बच्चों की शिक्षा पर अपना नजरिया रखा, उसने युवाओं की सोच को मंच पर सीधे-सीधे सामने ला दिया।
फोरम में अनन्या ने महिलाओं और वंचित समुदायों के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में आने वाली रुकावटों पर खुलकर बात की। उनके मुताबिक, अभी भी शिक्षा के सिस्टम में कई ऐसी जड़ें हैं जो किसी न किसी रूप में उपनिवेशवाद की सोच को आगे बढ़ाती हैं। यही वजह है कि गरीब तबके की लड़कियां और महिलाएं अक्सर शिक्षा से दूर रह जाती हैं।
शिक्षा को औपनिवेशिक सोच से मुक्त करने पर जोर
अनन्या की रिसर्च का एक अहम हिस्सा औपनिवेशिक सोच से जुड़े ऐतिहासिक ढांचे को तोड़ने पर रहा है। उनका कहना है कि जब तक हम अपनी शिक्षा प्रणाली को पुराने, बाहर से थोपी गई सोच से आज़ाद नहीं करेंगे, तब तक हाशिए पर खड़े लोगों के लिए असल मायने में बराबरी वाली पढ़ाई संभव नहीं हो सकती।
फोरम में खासतौर से 'डिकोलोनाइजिंग एजुकेशन' यानी शिक्षा को उपनिवेशिक प्रभाव से आज़ाद करने की थीम ध्यान का केंद्र रही। इस मुद्दे पर अनन्या ने कई उदाहरण दिए—जैसे स्कूलों में अभी भी यूरोपीय विचारधाराओं का ज्यादा असर, स्थानीय भाषाओं और मुद्दों की अनदेखी। वह मानती हैं कि अगर शिक्षा में अपनी जड़ों, अपनी परंपराओं और स्थानीय वास्तविकताओं को शामिल किया जाए, तो बच्चों व महिलाओं के लिए पढ़ाई और ज्यादा आसान व फायदेमंद हो सकती है।
अनन्या का यह भी मानना है कि आज के वक्त में युवाओं की भूमिका सिर्फ पढ़ाई करने तक सीमित नहीं है। मंच पर चर्चा के दौरान यह बात भी सामने आई कि किस तरह से युवा महिलाएं अक्सर घरों में देखभाल (केयरगिविंग) का दायित्व भी संभालती हैं, जिससे उनके आगे बढ़ने के मौके भी सीमित हो जाते हैं। इन युवा देखभालकर्ताओं को सपोर्ट मिले, उनके लिए अलग से योजनाएं बनें, इसी को लेकर फोरम में स्पेशल सेशन भी हुआ।
- बात सामने आई कि गांवों एवं गरीब इलाकों में लड़कियों को स्कूल छोड़ना पड़ता है ताकि वे घरेलू जिम्मेदारियां उठा सकें।
- अनन्या ने बताया कि युवाओं की आवाज़, अब केवल सोशल मीडिया या छोटे कैंपस तक सीमित नहीं रही। इंटरनेशनल फोरम में भी उनकी बात को खास अहमियत दी जा रही है।
- युवाओं की टीम ने फोरम को कुछ प्रैक्टिकल सुझाव भी दिए—जैसे स्कॉलरशिप योजनाओं में बदलाव, स्थानीय लैंग्वेज आधारित कोर्स, और हाशिए पर खड़े लोगों के लिए स्पेशल ऐड प्रोग्राम।
फोरम में अनन्या शर्मा की भागीदारी इसी बात का इशारा देती है कि आज वैश्विक नीति और बड़े मंचों पर भारतीय युवाओं की आवाज अब हाशिए पर नहीं, बल्कि मुख्यधारा में गूंज रही है। शिक्षा के ऐसे मुद्दों पर उनकी सोच नई दिशा देने के लिए तैयार है।
Rahul Tamboli
7 मई 2025अनन्या शर्मा ने तो बस एक बार बोलकर पूरा ECOSOC फोरम ही रिवोल्यूशन कर दिया 😍🔥 ये लड़की बस शिक्षा नहीं बदल रही... इतिहास बदल रही है। कल तक हम यूरोपीय सिलेबस को गॉड की बात मानते थे अब ये लड़की बोल रही है कि हमारी भाषा ही हमारी शिक्षा है। बस अब स्कूल में हिंदी में फिलॉसफी पढ़ाओ और देखो कैसे बच्चे जाग उठते हैं 🌱
Jayasree Sinha
9 मई 2025अनन्या के विचार बेहद सार्थक हैं। शिक्षा का औपनिवेशिक ढांचा वास्तव में अभी भी हमारी पाठ्यक्रमों में जमा हुआ है। स्थानीय भाषाओं को नज़रअंदाज़ करना और अंग्रेजी में बोलने को ही 'उन्नति' मानना, एक अंतर्निहित असमानता है। यह बदलाव आवश्यक है, और इसकी शुरुआत युवाओं द्वारा होनी चाहिए।
Vaibhav Patle
10 मई 2025दोस्तों, ये बस एक लड़की की बात नहीं है... ये भारत की नई आत्मा है! 🙌 जब हम अपनी भाषाओं को शिक्षा का हिस्सा बनाते हैं, तो बच्चे सिर्फ पढ़ते नहीं, बल्कि समझते हैं। मैंने अपने भाई को देखा है-गांव में बिहारी बोली में गणित सिखाया तो उसका अंक 35 से 89 हो गया! अब सोचो, अगर हर बच्चे को अपनी जड़ों से जोड़ दिया जाए तो कितने नोबेल प्राइज आएंगे? 🚀 ये बदलाव अभी शुरू हुआ है, लेकिन ये अंत नहीं, एक नई शुरुआत है। चलो इसे बढ़ाएं, चलो इसे बनाएं, चलो इसे जीएं! 💪❤️
Garima Choudhury
11 मई 2025ये सब बहुत सुंदर बातें हैं लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि ये सब बाहरी बलों का नाटक है? अमेरिका और यूरोप चाहते हैं कि हम अपनी शिक्षा को बदलें ताकि हम उनके लिए आसानी से बाहर जा सकें। अनन्या शर्मा को कौन बुला रहा है? क्या ये सब फंडिंग का खेल है? 🤔 ये जो 'डिकोलोनाइजिंग' बात है, वो तो बस एक ट्रेंड है जिसे सोशल मीडिया पर बढ़ाया जा रहा है। असली समस्या तो ये है कि सरकार के पास पैसे नहीं हैं तो वो युवाओं को बना रही हैं लीडर।
Hira Singh
11 मई 2025ये बात सुनकर मेरा दिल भर गया 😭 जब एक 20 साल की लड़की दुनिया के सामने अपने गांव की बहनों के लिए बोलती है, तो ये कोई स्पीच नहीं... ये तो एक जिंदगी की आवाज़ है। मैंने अपने घर में एक छोटी सी लाइब्रेरी शुरू की है जहां हम बच्चों को अपनी भाषा में कहानियां सुनाते हैं। अगर आप भी ऐसा कुछ करना चाहते हैं, तो मुझे DM करें-हम एक नेटवर्क बनाते हैं! 💫 ये बदलाव छोटे-छोटे कदमों से शुरू होता है। आज एक किताब, कल एक बच्चा, फिर एक गांव... और फिर दुनिया! 🌍📚
Ramya Kumary
12 मई 2025शिक्षा का उद्देश्य क्या है? क्या यह सिर्फ नौकरी पाने का जरिया है, या एक व्यक्ति को अपने आत्मा की आवाज़ सुनने का साधन? अनन्या ने बस एक सवाल उठाया है-हम अपने बच्चों को किस दुनिया में बढ़ने के लिए तैयार कर रहे हैं? जब हम उन्हें अपनी भाषा, अपनी लोककथाएं, अपनी गणित की रीतियाँ नहीं सिखाते, तो हम उनकी अस्तित्व की जड़ें काट रहे हैं। शिक्षा वह आईना है जिसमें एक समाज अपने आप को देखता है। अगर वह आईना विदेशी है, तो हम कौन बनेंगे? यह सवाल अब सिर्फ शिक्षकों का नहीं, बल्कि हर एक नागरिक का है।
Sumit Bhattacharya
14 मई 2025अनन्या शर्मा के उपस्थिति और उनके विचारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार करना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। शिक्षा के क्षेत्र में औपनिवेशिक विरासत के विश्लेषण की आवश्यकता है और इस दिशा में युवा नेतृत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्थानीय भाषाओं के समावेश के साथ-साथ स्कॉलरशिप और अतिरिक्त समर्थन प्रणालियों को संरचनात्मक रूप से लागू करने की आवश्यकता है। यह प्रक्रिया लंबी है लेकिन अत्यंत आवश्यक।