जब अर्शदीप सिंह, भारत के तेज गेंदबाजी के एक प्रमुख हथियार, अपनी उंगली पर गहरी घाव के कारण खेल से बाहर हो गए, तो टीम इंडिया के पास कोई और विकल्प नहीं था। परिणामस्वरूप, हरियाणा के 24 वर्षीय तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज को अंतिम दो टेस्ट मैचों के लिए टीम में शामिल किया गया। यह निर्णय बड़ी खबर थी क्योंकि इसका मतलब था कि कंबोज ने भारत बनाम इंग्लैंड टेस्ट श्रृंखलामैन्चेस्टर के चौथे टेस्ट मैच में अपना आधिकारिक पदार्पण किया, जो 23 जुलाई 2025 को शुरू हुआ था।
यह केवल एक सामान्य बदलाव नहीं था। कंबोज भारत के 318वें टेस्ट क्रिकेटर बन गए, लेकिन उनके साथ एक अनोखा रिकॉर्ड भी जुड़ गया। वे 1990 के बाद से मैन्चेसर में अपना टेस्ट डेब्यू करने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी हैं, जब अनिल कुंबले ने वहां पहली बार खेला था। "कर या मर" वाली स्थिति में, जहां इंग्लैंड ने पांच मैचों की श्रृंखला में 2-1 की बढ़त बना रखी थी, नए चेहरे पर भरोसा करना टीम के लिए एक बड़ा दांव था।
चोट और टीम में बदलाव: क्या हुआ?
BCCI के सूत्रों ने The Indian Express को बताया कि अर्शदीप सिंह की उंगली में लगे गहरे घाव की सिलाई की गई थी और चिकित्सीय जांच से पता चला कि उन्हें पूरी तरह ठीक होने में कम से कम 10 दिन लग सकते हैं। यह समय सीमा चौथे टेस्ट मैच के लिए उपलब्धता को असंभव बना देती थी।
टीम इंडिया के कप्तान शुभमन गिल ने चौथे टेस्ट के लिए प्लेइंग XI में तीन बड़े बदलाव किए। अर्शदीप की जगह अंशुल कंबोज आए, करुण नायर की जगह साईं सुद्धरसन को मौका मिला, और चोटिल नीतिष रेड्डी की जगह शार्दूल ठाकुर को चुना गया। सबसे दिलचस्प बात यह थी कि जसप्रीत बुमराह, जिन्होंने मूल रूप से सिर्फ पांचवें टेस्ट में खेलने और चौथे मैच को छोड़ने की योजना बनाई थी, अब इस महत्वपूर्ण मैच में शामिल होने के विकल्प पर विचार कर रहे थे। बुमराह ने इस श्रृंखला में से सिर्फ 3 मैच खेलने का टारगेट रखा था और उन्होंने पहले से ही 2 मैच पूरे कर लिए थे।
अंशुल कंबोज: आईपीएल से टेस्ट क्रिकेट तक
अंशुल कंबोज किसी ऐसे खिलाड़ी के रूप में आए जिन्होंने पहले से ही काफी अनुभव हासिल कर लिया है। फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में, उन्होंने 24 मैचों में 41 ओवरों में 79 विकेट लिए हैं। उनका सबसे बेहतरीन प्रदर्शन केरल के खिलाफ रहा, जहां उन्होंने एक ही पारी में सभी 10 विकेट अपने नाम किए। इसके अलावा, उन्होंने दो बार पांच विकेट लेने का शानदार प्रदर्शन किया है। बैटिंग में, उन्होंने 34 पारियों में 16.20 की औसत से 486 रन बनाए हैं।
आंतरिक लिस्ट ए और टी20 क्रिकेट में भी उनकी अच्छी प्रगति रही है—25 लिस्ट ए मैचों में 40 विकेट और 30 टी20 मैचों में 34 विकेट। टेस्ट डेब्यू से ठीक पहले, उन्होंने नॉर्थैम्पटन में 6-9 जून 2025 के दौरान इंग्लैंड लायंस के खिलाफ भारत 'ए' की प्रतिनिधित्व किया था। उस मुकाबले में उन्होंने दोनों पारियों में दो-दो विकेट लिए और दूसरी पारी में 51 रन की नाबाद पारी खेली, जिससे मैच ड्रॉ रहा।
आईपीएल के संदर्भ में, कंबोज चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के हिस्से हैं। 2025 के मेगा ऑक्शन में उन्हें 3.40 करोड़ रुपये में खरीदा गया था। उन्होंने 11 अप्रैल 2025 को चेन्नई में कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ अपनी आईपीएल शुरुआत की थी, जहां उन्होंने एक विकेट लिया। 2025 के सीजन में CSK के लिए 8 मैचों में उन्होंने 8 विकेट हासिल किए। पिछले साल, 2024 के सीजन में, उन्होंने मुंबई इंडियंस के लिए 3 मैचों में 2 विकेट लिए थे। इससे पहले वह राष्ट्रीय टीम के किसी भी फॉर्मेट में नहीं खेले थे।
मैन्चेस्टर में प्रदर्शन: गति बनाम कौशल
अपने डेब्यू टेस्ट मैच में, कंबोज ने पहली पारी में 30 ओवर डाले, 116 रन दिए और 2 विकेट लिए। बैटिंग में उन्होंने पहली पारी में 25 और दूसरी पारी में 24 रन बनाए। हालांकि, उनके प्रदर्शन पर सबसे ज्यादा चर्चा उनकी गेंदबाजी की गति के बारे में हुई। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी औसत गेंदबाजी गति सिर्फ 122 किलोमीटर प्रति घंटा थी, जो कि आधुनिक तेज गेंदबाजी के मानकों से काफी कम है।
क्रिकट विश्लेषकों ने इस गति पर कई सवाल उठाए। लेकिन यहीं पर कहानी में एक मोड़ आया। पूर्व भारतीय स्पिनर राविचंद्रन अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर कंबोज की तारीफ की। अश्विन ने कहा कि कंबोज उन दुर्लभ भारतीय तेज गेंदबाजों में से एक हैं जो केवल खुरदरी गति पर नहीं, बल्कि कौशल और तकनीक पर निर्भर करते हैं। उन्होंने उन्हें झाहीर खान और जसप्रीत बुमराह से तुलना की, जो अपनी स्मार्ट गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं।
मैच की स्थिति और आगे की राह
चौथे टेस्ट मैच के तीसरे दिन के अंत तक, इंग्लैंड ने एक मजबूत स्थिति बना ली थी। जो रूट ने तीसरे दिन 150 रन की बड़ी पारी खेली, जिससे इंग्लैंड ने 7 विकेट के नुकसान पर 544 रन बनाए। भारत पर 188 रन की पिछड़ापन था। यह मैच भारत के लिए श्रृंखला में जीवित रहने के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ था। अगर भारत हारा, तो श्रृंखला समाप्त हो जाती; जीतने पर ही उम्मीद बनी रहती।
अंशुल कंबोज के डेब्यू ने न केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि दर्ज की है, बल्कि यह भारत की युवा तेज गेंदबाजी लाइनअप की गहराई को भी दिखाता है। चाहे उनकी गति कम क्यों न हो, लेकिन अगर वे अश्विन द्वारा बताए गए 'कौशल आधारित' दृष्टिकोण को बनाए रखते हैं, तो वे अगले कुछ वर्षों में भारतीय टीम के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प साबित हो सकते हैं।
Frequently Asked Questions
अंशुल कंबोज ने टेस्ट डेब्यू क्यों किया?
अंशुल कंबोज ने इसलिए टेस्ट डेब्यू किया क्योंकि मुख्य तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह को उंगली में गहरी चोट लगी थी, जिसकी सिलाई की गई थी। चिकित्सकों के अनुसार, अर्शदीप को ठीक होने में कम से कम 10 दिन लग सकते थे, इसलिए चौथे टेस्ट मैच के लिए उन्हें टीम से बाहर रहना पड़ा।
अंशुल कंबोज का मैन्चेस्टर में डेब्यू विशेष क्यों है?
अंशुल कंबोज 1990 के बाद से मैन्चेस्टर में अपना टेस्ट डेब्यू करने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी हैं। उस समय से लेकर अब तक, 1990 में अनिल कुंबले के बाद कोई भी भारतीय खिलाड़ी इस स्थान पर अपना टेस्ट करियर शुरू नहीं करता था।
अंशुल कंबोज की गेंदबाजी की गति कितनी थी?
अपने डेब्यू मैच में, अंशुल कंबोज की औसत गेंदबाजी गति लगभग 122 किलोमीटर प्रति घंटा रिकॉर्ड की गई। यह गति आधुनिक तेज गेंदबाजों की तुलना में कम मानी जाती है, लेकिन पूर्व खिलाड़ियों ने इसे तकनीकी कौशल के आधार पर समझाया है।
राविचंद्रन अश्विन ने अंशुल कंबोज के बारे में क्या कहा?
पूर्व भारतीय स्पिनर राविचंद्रन अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर अंशुल कंबोज की तारीफ की। उन्होंने कहा कि कंबोज उन दुर्लभ भारतीय तेज गेंदबाजों में से हैं जो केवल गति पर नहीं, बल्कि कौशल और तकनीक पर भरोसा करते हैं। उन्होंने उन्हें झाहीर खान और जसप्रीत बुमराह से तुलना की।
अंशुल कंबोज की आईपीएल की पृष्ठभूमि क्या है?
अंशुल कंबोज 2025 के आईपीएल मेगा ऑक्शन में 3.40 करोड़ रुपये में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) द्वारा खरीदे गए थे। उन्होंने 2025 के सीजन में CSK के लिए 8 मैचों में 8 विकेट लिए थे। इससे पहले, 2024 के सीजन में उन्होंने मुंबई इंडियंस के लिए 3 मैचों में 2 विकेट लिए थे।